प्यासी लाली पड़ोस का नशा

मेरा नाम अंकित है। 18 साल का जवान लड़का, 5 फीट 6 इंच का कद, और एक ऐसा जिस्म जो अभी जवानी की आग में तप रहा था। मेरा लंड, 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा, मेरी उम्र से कहीं ज्यादा बेकरार था। यह कहानी मेरी जिंदगी का वो सच है, जो शायद हर लड़के का सपना होता है—या शायद उसकी हकीकत का सबसे खतरनाक मोड़।

पड़ोस में रहती थीं लाली आंटी। 40 की उम्र, 38C-34-42 का फिगर, और एक ऐसी अदाएं जो किसी को भी पागल कर दें। उनकी आंखों में हंसी थी, लेकिन दिल में एक ऐसी आग जो बुझने का नाम नहीं लेती थी। उनके पति का दिमाग कमजोर था—पागलपन की हद तक। दो बेटे थे, दोनों मुंबई में नौकरी करते थे। लाली आंटी घर में अकेली, और शायद इसी अकेलेपन ने उन्हें वो रास्ता दिखाया जो मेरे साथ जा मिला।

हम नए-नए पड़ोस में आए थे। एक दिन बाजार जाने की बात हुई। पापा ने कहा, “अंकित, आंटी को साथ लेते जाओ।” मैंने हां कर दी। बाइक पर वो मेरे पीछे बैठीं, उनकी सांसें मेरी गर्दन से टकरा रही थीं। रास्ते में पढ़ाई की बातें हुईं, लेकिन उनकी आवाज में कुछ और था—एक ललक, एक बेचैनी। उस दिन से हमारी जान-पहचान बढ़ी। वो मुझे अपने साथ ले जाने लगीं, मैं उनके घर आने-जाने लगा।

फिर शुरू हुआ वो खेल। लाली आंटी मुझे अपने जिस्म के दर्शन करवातीं। कभी झुककर अपने दूध दिखातीं, कभी बाथरूम से बिना सलवार बाहर आतीं। एक दिन तो हद हो गई—उन्होंने कहा, “अरे, पैंटी गीली हो गई थी,” और उनकी मटकती गांड देखकर मेरा लंड पत्थर हो गया। कमरे का दरवाजा खुला छोड़कर वो गाजर से अपनी प्यास बुझा रही थीं, मेरे नाम की सिसकारियां लेते हुए—“आह अंकित, मुझे चोद दे!” मैं बाहर खड़ा सब सुन रहा था, और बाथरूम में उनकी पैंटी पर मुठ मारकर अपनी ठरक शांत की।

वो दिन आया जब मम्मी-पापा शादी में गए। मुझे आंटी के घर रुकना था। रात में मैं लोअर और टी-शर्ट में उनके पास पहुंचा—अंडरवियर जानबूझकर छोड़ दिया। आंटी ने अपने पति को सुलाया और मेरे बगल में नाइटी पहनकर लेट गईं। बातें शुरू हुईं, वो रोने लगीं। मैंने हाथ पकड़ा, और अचानक वो मुझे गले लगाकर चिपक गईं। मेरे हाथ उनकी पीठ से होते हुए उनकी गांड तक पहुंचे। होंठ मिले, और फिर कपड़े उतरते चले गए।

हम 69 में उलझ गए। उनकी चूत की गर्मी और मेरे लंड की सख्ती—10 मिनट में हम एक-दूसरे के मुंह में झड़ गए। फिर मैंने उनका जिस्म चूमा, और वो मेरा लंड चाटकर तैयार करने लगीं। पहली बार था मेरा, मैंने लंड उनकी चूत में पेल दिया। वो सिसकारी ले रही थीं—“आह उह्ह उम्म!” 20 मिनट की चुदाई के बाद हम फिर झड़े। वो मेरा लंड चाटकर साफ कर रही थीं, और कहने लगीं, “अंकित, अभी तुम्हें तरीका नहीं पता। कल सिखाऊंगी।” मैंने हंसकर कहा, “ठीक है, मेरी रंडी आंटी!”

रात भर चुदाई का दौर चला। कभी कुतिया बनाकर, कभी उनके पति के सामने—वो बस सिसकारियां लेती रहीं। सुबह शॉवर में, नंगे खाने में, और फिर नंगे सोने में—दो दिन तक हमने हर हद पार की। आंटी ने मुझे सेक्स की बारीकियां सिखाईं, और मैं उनकी प्यास का आलम बन गया।

मम्मी-पापा के आने से खेल रुका, लेकिन मौका मिलते ही मैं लाली आंटी के पास पहुंच जाता। वो मेरी प्यासी आंटी थीं, और मैं उनका नशा।